जमुई, बिहार। प्यार, सहारा और अपनापन उम्र का मोहताज नहीं होता। बिहार के जमुई जिले से सामने आई एक अनोखी शादी की कहानी इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां खैरा प्रखंड के डुमरकोला गांव में 65 वर्षीय चपट मांझी ने अपनी 62 वर्षीय पड़ोसन आशा देवी के साथ मंदिर में शादी रचाकर समाज की पारंपरिक सोच को चुनौती दे दी।
दोनों बुजुर्गों की यह शादी अब गांव से लेकर सोशल मीडिया तक लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है। कोई इसे सच्चे साथ का उदाहरण बता रहा है, तो कोई इसे सामाजिक बंधनों के खिलाफ साहसी कदम मान रहा है।
अकेलेपन ने करीब लाया
जानकारी के मुताबिक चपट मांझी की तीन पत्नियों की पहले ही मौत हो चुकी है। तीसरी पत्नी का निधन करीब 15 साल पहले हुआ था, जिसके बाद वह पूरी तरह अकेले हो गए थे। बढ़ती उम्र और खराब सेहत के कारण उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
वहीं पड़ोस में रहने वाली आशा देवी भी विधवा थीं। उनके पति की मौत दो साल पहले हो चुकी थी। परिवार होने के बावजूद वह खुद को अकेला महसूस करती थीं। गांव वालों के अनुसार दोनों पिछले करीब एक साल से एक-दूसरे का सहारा बने हुए थे।
धीरे-धीरे दोनों के बीच अपनापन बढ़ा और दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला कर लिया।
मंदिर में लिए सात फेरे
शनिवार को दोनों महादेव सिमरिया मंदिर पहुंचे, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शादी संपन्न हुई। शादी में गांव के कुछ लोग भी मौजूद रहे। विवाह की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला दूर-दूर तक चर्चा में आ गया।
चपट मांझी ने बताया कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें किसी ऐसे साथी की जरूरत थी, जो सुख-दुख में साथ खड़ा रहे। उन्होंने कहा कि गांव में लोग उनके रिश्ते को लेकर तरह-तरह की बातें करते थे और कई बार ताने भी सुनने पड़ते थे। आखिरकार दोनों ने रिश्ते को सामाजिक पहचान देने का फैसला किया।
परिवार ने जताई नाराजगी
हालांकि इस शादी से परिवार के कुछ सदस्य खुश नहीं हैं। चपट मांझी के बेटे और बहू ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। परिवार का कहना है कि इस उम्र में शादी करना समाज के लिए गलत संदेश है। बताया जा रहा है कि बेटे ने अपने पिता को साथ रखने से भी इनकार कर दिया है।
इसके बावजूद गांव के कई लोग बुजुर्ग दंपति के समर्थन में सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर दो लोग अपनी मर्जी से साथ रहना चाहते हैं तो समाज को इसमें दखल नहीं देना चाहिए।
बदलती सोच की मिसाल बनी शादी
स्थानीय लोगों और सामाजिक जानकारों का मानना है कि यह घटना सिर्फ एक शादी नहीं बल्कि ग्रामीण समाज में बदलती सोच की तस्वीर भी है। आज के समय में बुजुर्गों के बीच अकेलापन एक बड़ी समस्या बन चुका है। ऐसे में भावनात्मक सहारा और साथ किसी भी उम्र में जरूरी होता है।
जमुई की यह अनोखी शादी अब एक बड़ा सवाल भी छोड़ गई है—क्या समाज बुजुर्गों को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की आजादी देने के लिए तैयार है?

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