बताया जा रहा है कि इन मूर्तियों का कुल वजन करीब 45 किलोग्राम था और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत 7 से 8 करोड़ रुपये तक आंकी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, चोरों ने देर रात मंदिर के मुख्य द्वार और गर्भगृह का ताला तोड़कर वारदात को अंजाम दिया। हैरानी की बात यह है कि घटना के समय मंदिर परिसर में मौजूद महिला पुजारी को इसकी भनक तक नहीं लगी। सुबह जब मंदिर का दरवाजा टूटा मिला, तब इस बड़ी चोरी का खुलासा हुआ।
मंदिर समिति के सचिव मुनदेव सिंह ने बताया कि चोरी हुई मूर्तियां बेहद प्राचीन और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थीं। इनकी स्थापना वर्ष 1935 में की गई थी और तब से यह मंदिर इलाके की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है।
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में जुट गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। स्थानीय मुखिया रवि प्रकाश ने क्षेत्र में बढ़ते अपराध को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मूर्तियों की बरामदगी नहीं होती, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मसौढ़ी थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। एफएसएल और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स की टीम भी मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटा रही है। थानाध्यक्ष विवेक भारती के अनुसार, संदिग्धों से पूछताछ जारी है और जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।
यह घटना सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था पर गहरी चोट मानी जा रही है। अब सभी की नजर पुलिस कार्रवाई पर टिकी है।

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