नालंदा, बिहार: बिहार के नालंदा जिले की बिहारशरीफ मंडल कारा में कैदी की रिहाई के दौरान कथित तौर पर बड़ी लापरवाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि अदालत से जमानत एक बंदी को मिली थी, लेकिन पहचान में गड़बड़ी के कारण दूसरे कैदी को जेल से रिहा कर दिया गया। इस चूक का खुलासा करीब सात दिन बाद हुआ, जिसके बाद जेल प्रशासन में हलचल मच गई।
मामले में जेल अधीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर कारा महानिरीक्षक (जेल आईजी) ने तीन जेलकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
नाम की समानता बनी गड़बड़ी की वजह
मिली जानकारी के अनुसार, अस्थावां थाना कांड संख्या 203/26 और 201/26 में आरोपित सतीश चौहान उर्फ सतीश बिंद बिहारशरीफ जेल में बंद था। इसी जेल में अस्थावां थाना कांड संख्या 362/25 का आरोपित चंद्रदीप चौहान उर्फ चंद्रदीप बिंद भी बंद था।
बताया जा रहा है कि सतीश चौहान के पिता का नाम भी चंद्रदीप है। आरोप है कि नामों में समानता और पहचान संबंधी प्रक्रिया में हुई चूक के कारण 24 सितंबर को सतीश की जगह चंद्रदीप चौहान उर्फ बौना को जेल से बाहर जाने दिया गया।
एक सप्ताह बाद सामने आई लापरवाही
रिहाई के दौरान हुई इस कथित गलती की जानकारी जेल प्रशासन को तत्काल नहीं मिल सकी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एक अक्टूबर को सहायक प्रवेश शाखा के कक्षपाल नवीश कुमार की रिपोर्ट के बाद मामला सामने आया। जांच में पता चला कि जमानत पाने वाला सतीश चौहान जेल में ही बंद था, जबकि उसकी जगह दूसरा बंदी बाहर जा चुका था।
मामले का पता चलने के बाद जेल प्रशासन ने रिकॉर्ड और रिहाई से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की।
वास्तविक कैदी को दो अक्टूबर को मिली रिहाई
गड़बड़ी सामने आने के बाद दो अक्टूबर की सुबह जमानत पाने वाले सतीश चौहान को नियमानुसार रिहा किया गया। वहीं, गलत पहचान के कारण जेल से बाहर निकले चंद्रदीप चौहान उर्फ बौना ने उसी दिन दोपहर करीब तीन बजे स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, चंद्रदीप के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज थे। इनमें से एक मामले में उसे जमानत मिली थी, जबकि दूसरे मामले में जमानत लंबित थी। इसके बावजूद उसके जेल से बाहर निकलने को लेकर रिहाई प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना ने कैदियों की पहचान, अदालत के जमानत आदेशों के सत्यापन और अन्य लंबित मामलों की जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। यह भी जांच का विषय है कि रिहाई से पहले संबंधित बंदी के सभी मामलों की स्थिति का सत्यापन किस तरह किया गया।
मामले को लेकर एक स्थानीय कांग्रेस नेता ने भी वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन देकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।
तीन जेलकर्मी निलंबित
जेल अधीक्षक ने संबंधित ड्यूटीकर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा और प्रारंभिक जांच के बाद मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी। इसी रिपोर्ट के आधार पर जेल आईजी ने लापरवाही के आरोप में तीन जेलकर्मियों को निलंबित कर दिया।
अब इस मामले में रिहाई के दौरान हुई चूक और कैदी की पहचान सत्यापित करने की प्रक्रिया की भूमिका अहम मानी जा रही है।

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